🪷  शुभारंभ — व्रत उत्थान एकादशी, 13 अप्रैल 2026 · स्थान शीघ्र भर रहे हैं

सोम · बुध · शुक्र · प्रातः 7–8 बजे · ऑनलाइन

महिषासुर मर्दिनी

दिव्य शक्ति की उग्र कृपा
का आवाहन करें

युद्ध की कथा और श्लोक के अर्थ से लेकर अयि गिरि नंदिनी की विद्युतमय लय तक — एक ही पूर्ण, भक्ति-पूर्ण पाठ्यक्रम में।

पंजीकरण खुला है · 13 अप्रैल एकादशी से प्रारंभ

21

पावन श्लोक

3

पाठ्यक्रम भाग

साप्ताहिक सत्र

आजीवन पहुंच

महिषासुर मर्दिनी की उग्र कृपा का आवाहन करें — शक्ति, साहस और दिव्य रक्षा का स्वरूप। एक सुंदर, शुद्ध ऊर्जा का उद्गार।

What you'll learn

प्रत्येक श्लोक के माध्यम से एक पूर्ण यात्रा

सीखने के छह स्तंभ — हर स्तर के भक्तों के लिए व्यवस्थित।

📖

पावन कथा

महिषासुर के साथ देवी का ब्रह्मांडीय युद्ध — अंधकार पर शक्ति की विजय, देवी माहात्म्य से ली गई

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लय और छंद

अयि गिरि नंदिनी की प्रसिद्ध आवर्ती ताल — एक छंद जो ध्यानमय गहराई और ऊर्जावान उत्थान उत्पन्न करता है

🙏

श्लोक-दर-श्लोक अर्थ

सभी 21 श्लोकों का पूर्ण विश्लेषण — प्रत्येक विशेषण, रूपक और दिव्य गुण की व्याख्या

शक्ति दर्शन

युद्ध का प्रतीकवाद, देवी के शस्त्र और रूप, और दिव्य स्त्री शक्ति का गहरा अर्थ

🎵

भक्ति गायन

पारंपरिक लयबद्ध पैटर्न के साथ उचित संगीतमय प्रस्तुति जो इस स्तोत्र को इतना प्रभावशाली बनाती है

📹

आजीवन रिकॉर्डिंग

हर कक्षा के नोट्स और वीडियो रिकॉर्डिंग — जब चाहें, हमेशा के लिए पुनः देखें

Course structure

सब कुछ, सही क्रम में

क्रम में सिखाया गया — आवाहन से फलश्रुति तक।

I

स्तुति प्रकरण

दिव्य माता का आवाहन और स्तुति

श्लोक 1–7
II

युद्ध वर्णन

दिव्य युद्ध — महिषासुर पर देवी की विजय

श्लोक 8–16
III

फल वाक्य और फलश्रुति

विजय घोषणा और समर्पित पाठ के फल

श्लोक 17–21

Schedule

सप्ताह में तीन दिन, प्रातःकालीन सत्र

अपना दिन देवी की कृपा से प्रारंभ करें — सबसे शुभ आरंभ।

दैनिक समयप्रातः 7–8 बजे
कक्षा के दिनसोम · बुध · शुक्र
माध्यमऑनलाइन — कहीं से भी जुड़ें
स्तरसभी स्तरों का स्वागत
  • ✓  रिकॉर्डिंग तक आजीवन पहुंच
  • ✓  सप्ताह-दर-सप्ताह संरचित प्रगति
  • ✓  शुभ एकादशी से प्रारंभ
रुबल शर्मा वीणा के साथ

आपकी शिक्षिका

रुबल शर्मा

हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीतज्ञ · आध्यात्मिक साधक

बचपन से हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में प्रशिक्षित, रुबल को अपनी गहरी पुकार ब्रह्म मुहूर्त की निश्चलता में मिली। प्रातःकाल से पहले जागकर प्राचीन श्लोकों का पाठ करते हुए, उन्होंने वह पाया जो आधुनिक संसार ने चुपचाप छीन लिया था: पवित्र ध्वनि के जीवंत स्पंदन, जो सदियों से गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से चले आ रहे हैं।

ब्रह्म मुहूर्त क्लब उसी अनुभूति से जन्मा — एक व्यवसाय के रूप में नहीं, बल्कि एक पवित्र कर्तव्य के रूप में। प्रत्येक श्लोक शब्द-दर-शब्द समझा जाता है, हृदय में अनुभव किया जाता है, और दैनिक साधना में बुना जाता है।

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पंजीकरण अब खुला है

देवी के पावन स्तोत्र के साथ अपनी यात्रा आरंभ करें

इस पावन अध्ययन यात्रा पर देश भर के भक्तों के साथ जुड़ें — 13 अप्रैल 2026, एकादशी से प्रारंभ।

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